इस ब्लॉग को प्रारम्भ करने का उद्देश्य: मंच की दशा और दिशा पर चर्चा करना। यह संवाद यात्रा AIMYM द्वारा अधिकृत नहीं है। संपर्क-सूत्र manchkibaat@gmail.com::"

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Friday

युवा मंथन : 2011

मंच की अविरल संवाद यात्रा में शामिल होने हेतु आप सादर आमंत्रित हैं...

अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच - दशम राष्ट्रीय अधिवेशन

Tuesday

"प्रगति, दिशा और लक्ष्य"


"प्रगति, दिशा और लक्ष्य" यह मूल मंत्र तय किया गया है, २६ दिसम्बर २००८ से आरम्भ होने वाले इस राष्ट्रीय अधिवेशन का। ब्लॉग के शुरुवात में मैंने यह लिखने की धृष्टता की थी - "कारवां २००८ में यह थीम सटीक और सामायिक है। पर सही थीम तय कर देने भर से अशिवेशन की सार्थकता तय नहीं हो जाती है। इसके लिए जरूरी है की नेतृत्व इस थीम पर कुछ कार्य करें। आशा करता हूँ की नेतृत्व जल्द ही अधिवेसन से अपनी अपेक्षाओं का खुलासा करेगा और थीम पर अपनी सोच भी सदस्यों के सामने रखेगा।"


मगर अफ़सोस यह है कि नेतृत्व की ओर से ऐसा कोई संवाद सदस्यों से नही किया गया है। संभवतः मैं उनकी ऊंची सोच को समझ नही पा रहा हूँ। शायद ऐसा सोचा जा रहा हो कि "प्रगति, दिशा और लक्ष्य" पर सही चिंतन dias ही कर पायेगा, या कि ऐसे किसी चिंतन में साधारण सदस्यों की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। प्रस्तावित कार्यक्रम सूचि का अवलोकन करने के बाद कम से कम मुझ जैसे साधारण सदस्य को यही लगा कि "प्रगति, दिशा और लक्ष्य" सिर्फ़ एक स्लोगान भर है और इसे थीम मान कर अपेक्षाएं नही पाली जानी चाहिए।


लेकिन मुझे राष्ट्रीय नेतृत्व पर पुरी आस्था है, और मैं अब भी आश्वस्त हूँ कि यह थीम सिर्फ़ शब्द मात्र नही रहेंगे, बल्कि वाकई में इस अधिवेशन में इस थीम पर चर्चा होगी। जहाँ अब तक की प्रगति पर करतल ध्वनि से मंच सेनानियों का अभिनन्दन होगा, वहीँ मंच की दिशा पर सामूहिक चिंतन होगा और लक्ष्य का पुनः निर्धारण किया जाएगा। आमीन। मैं जानता हूँ और मानता हूँ कि ब्लॉग में ग्यान बघारना बहुत आसान है, और कार्य संपादित करना बहुत मुश्किल। पर मैं यह भी मानता हूँ कि अपेक्षाएं समर्थ लोगो से ही रखी जाती है।


आशा की जा रही है कि कम से कम २५०० प्रतिनिधि इस महाकुम्भ में भाग लेंगें। उन सभी प्रतिनिधि भाई बहनों का हार्दिक अभिनन्दन। अभिनन्दन रांची शाखा के कर्मठ साथियों का जो दिन रात इस महाकुम्भ को सफल बनने में तन, मन और धन से जुटे हुवे हैं। अभिनन्दन मंच नेतृत्व का, जो इस अधिवेशन को यादगार बनने हेतु दिन रात जुटे हुवे है।


अजातशत्रु



कल इस ब्लॉग से सम्बंधित दो टिप्पणिया आयी थी। मुझे लग रहा है कि इन दोनों टिप्पणिया पर मेरा जवाब दिया जाना जरूरी है। टिप्पणिया यूँ थी:-
मैंने सुना है कि मंच नेतृत्व को आपका ब्लॉग रास नही आ रहा है। पहले तो यह सुना करता था कि पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस ब्लॉग को प्रोत्साहन न दे. आज यह सुना है कि कल दक्षिण भारत में किसी हस्ती ने इस ब्लॉग को मंच की अखंडता के लिए खतरा बताया है. अजातशत्रु जी, कृपया लोगों को बताएं कि क्या आपने इस ब्लॉग के सम्बन्ध में मंच नेतृत्व को सूचित किया था? क्या मंच नेतृत्व ने आपको ब्लॉग के सम्बन्ध में कोई नसीहत या सुझाव दिया था? आपने अपने ब्लॉग में सिर्फ़ एक ही उम्मीदवार का परिचय प्रकाशित किया है, अन्य किसी का भी नही किया? कहीं आप इस ब्लॉग को किसी व्यक्ति विशेष को समर्थन देने हेतु तो नहीं चला रहें हैं?

जीवराज जैन, गुवाहाटी ९४३५०-40907

आपसी संवाद के लिए ब्लॉग न सिर्फ़ एक अच्छा माध्यम है बल्कि २१वि सदी की जरुरत भी है। अभी तक मंच के भूतपूर्व और वर्त्तमान नेत्रत्व का इस ब्लॉग से दूर रहने का कारण ये नही की ब्लॉग कोन्त्रोवेर्सिअल है और उनके पार्टिसिपेशन से इसे वैधानिक मान्यता मिलेगी बल्कि ये दर्शाता है की अभी भी मंच की लीडरशिप २१वि सदी के संवाद माध्यमो से अन्नाभिग है. मंच मैं प्रोफ़ेसिओनलिस्म का आभाव सुरु से ही रहा है और ये अब दूर होना चाहिए.

प्रमोद कुमार जैन, गुवाहाटी
यूँ तो प्रमोद जी जैन की टिपण्णी स्वयं ही जीवराज जी द्वारा उठाये गए सवालों का कुछ जवाब देती प्रतीत भी हो रही है। जीवराज जी जिस निर्देश की बात कर रहे हैं, हमें उसके बारे में कुछ भी नही पता, पर स्थितियों को देखते हुवे हम उनकी इस बात को ग़लत भी नही कहना चाहेंगे।
दक्षिण भारत में किस हस्ती ने कब और क्या कहा, यह भी हमें नहीं पता। हमारा तो यह मानना है कि यदि इस ब्लॉग पर आपत्ति रखने वालों को हमसे संपर्क कर अपनी आपत्ति बतानी चाहिए। हम भी मंच सदस्य/ हितैषी है, कभी भी मंच का नुकसान नहीं चाहेंगे। यदि यह ब्लॉग वाकई में मंच की अखंडता क लिए खतरा है तो हम त्वरित रूप से इस ब्लॉग को बंद कर देंगे। पर कोई हमें समझाए तो सही कि यह ब्लॉग किस प्रकार मंच कि अखंडता के लिए खतरा है?
जीवराज जी ने पूछा है कि क्या हमने मंच नेतृत्व को इस ब्लॉग क बारे में सूचित किया था? जी हाँ, हमने इस ब्लॉग कि सुचना शीर्ष नेतृत्व सहित और भी बहुत से पदाधिकारियों को दी है और कई कई बार दी है। जीवराज जी के दुसरे सवाल का जवाब यह है कि मंच नेतृत्व से इस ब्लॉग को कोई सुझाव या नसीहत नही दी गयी।

तीसरा सवाल भी काफी गंभीर है। हम यह कहना चाहेंगे कि यह सोचना बिल्कुल बेबुनियाद है कि इस ब्लॉग को किसी व्यक्ति विशेष को समर्थन प्रदान करने हेतु चलाया जा रहा है। हम तो पिछले एक माह से उम्मीदवारों से अनुरोध करते आ रहें हैं कि आप अपना बायो डाटा भेजें या भिजवायें। हमें एक ही प्रत्यासी का बायो डाटा प्राप्त हुवा जिसे हमने प्रकाशित भी कर दिया है। हम वचन वद्ध हैं कि यह ब्लॉग किसी भी प्रत्यासी विशेष के समर्थन या विरोध में कोई कार्य नहीं करेगा। पूर्वाग्रहों का इलाज़ क्या हो सकता है, यह हमें नहीं पता।
जहाँ तक इस ब्लॉग के रास न आने की बात है, हमारा मानना है कि दो-तरफा संवाद सूत्र की उपयोगिता समझने वालों को यह ब्लॉग निःसंदेह रास आ रहा है। हम विपरीत विचारों का हमेशा स्वागत करते हैं। इस ब्लॉग से मंच को नुक्सान पहुँचने की आशंका रखने वालो से अनुरोध है की वो अपनी आशंकाएं खुल कर इस ब्लॉग पर कहें ताकि मंच सदस्य इस मामले में सही निर्णय ले सके।
अजातशत्रु

Saturday

यह ब्लॉग अजातशत्रु का नही है.

साथियों,
बिगत १५० घंटो मैं इस ब्लॉग पर अनुपस्थित रहा। पर ब्लॉग की रफ़्तार या ब्लॉग के तेवर में कोई भी फर्क नहीं आया। क्या यह इस बात को स्थापित नहीं करता कि यह ब्लॉग अजातशत्रु का नहीं है बल्कि हर एक उस मंच प्रेमी का है जो इस ब्लॉग को अपनाना चाहता है?
जो लोग अजातशत्रु के छद्मनाम या काल्पनिक व हास्यस्पद आशंकाओं का बहाना बनाकर इस ब्लॉग का विरोध कर रहे हैं, उनसे मेरा पुनः अनुरोध है कि इस संवाद सूत्र का विरोध करने के वजय इसे समर्थन दे। इस ब्लॉग का हर एक लेखक और समर्थक मंच प्रेमी है और मंच प्रेमी कभी मंच का बुरा नही चाहेंगें। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मार्ग अवरूद्ध न करें, बल्कि प्रोत्साहन दें

हमारे आने पे परेशां न हो गुंचो,
हम बाग़ लगाया करते हैं, उजाडा नहीं करतें।

अजातशत्रु

Wednesday

चलते चलते

इस ब्लॉग को प्रारम्भ करने का उद्देश्य शुरुवात से ही स्पष्ट है। मंच कि दशा और दिशा पर चर्चा करना। मंच यात्रा कि समीक्षा करना और इन बिषयों पर विचार मंथन प्रारम्भ करना। विचार मंथन या समीक्षा की प्रक्रिया में नेतृत्व द्वारा किए गए कुछ कार्यो से या निर्णयों से लेखकों और विचारकों की असहमति भी हो सकती है। उन असहमतियों को भी इस ब्लॉग के माध्यम से नेतृत्व तक पहूंचाया जा सकता है। पर असहमति कार्यो और निर्णयों तक ही रहे तभी इस संबाद यात्रा की गरीमा बनी रह सकेगी।
इसी कड़ी में एक बात और कही जानी चाहिए की असहमति को नकारात्मक बात का लेबल लगा कर आँख बंद कर लेना भी किसी नेतृत्व वर्ग को शोभा नही देता है।

Saturday

महाराष्ट्र जैसी घटनाएं और मारवाड़ी

साथियो,
मुझे लगता है चर्चा ज्यादा ही संगठन केंद्रित हो रही है। क्या यह अच्छा नहीं होगा कि हम ऐसे मुद्दों पर भी लिखें जो व्यापक मारवाड़ी समाज से सरोकार रखते हों। मसलन, यह बात मैं सोचता रहता हूं कि यदि कल को मुंबई में मारवाड़ी समाज के साथ वैसा ही सुलूक होने लगे जैसा आज बिहार और यूपी वालों के साथ हो रहा है, तो क्या आवाज उठाने वाला और प्रधानमंत्री को कार्रवाई करने के लिए मजबूर करने वाले नेता हमारे पास हैं। तब क्या हम राजस्थान के मुख्यमंत्री के मुंह की ओर ताकते नहीं रह और नतीजे में निराश होते नहीं रह जाएंगे? क्या हमें समज रहते सोचना और अपनी आज तक की मेहनत को सही रास्ते पर नहीं लगाना चाहिए? क्या एक राजनीतिक ताकत हासिल नहीं करनी चाहिए? जो ताकत है उसे एकजुट करना नहीं चाहिए?
विनोद रिंगानिया

मुझे पता चला है की कुछ लोग हिन्दी में अपना कॉमेंट्स देना चाहते हैं लेकिन उनके कंप्यूटर पर हिन्दी फॉण्ट नहीं होने के कारन वो ऐसा नहीं कर पा रहें है। उन सदस्यों के सुविधार्थ इस पेज पर एक hindi convertor दिया हुवा है। सदस्य अपनी टिपण्णी इस converter में टाइप करें और पुरे टेक्स्ट को कॉपी कर comments box में पेस्ट कर दें।

ajatshatru

अजातशत्रु जी को मेरी और से हार्दिक धन्यवाद और शुभकामनाएं। इस ब्लॉग में मुझे आमंत्रित करने के लिए अनेकानेक धनयबाद। मैं कोशिश करूंगा की यह ब्लॉग मंच चर्चा का एक सशक्त मध्यम बने।
रवि अजितसरिया

Thursday

सभी मंच प्रेमियों को मेरा सप्रेम नमस्कार। मेरे और मेरे जैसे मंच प्रेमोयों के विचारों की अभिब्यक्ति की उत्कंठा का परिणाम है यह ब्लॉग। २५ वर्ष के इतिहास को संजोये आज का यह मंच परिवार लगातार विराटता और विशालता की और अग्रसर है। ५-७ लोगो द्वारा प्रारम्भ की गयी यह यात्रा एक विशाल कारवें में तब्दील हो गयी है। ऐसे में आज इस मोड़ पर यह तय कर लेना जरूरी हो जाता है की कारवां सही रास्ते पर जा रहा है या नहीं? यह जान लेना भी जरूरी हो जाता है की कहीं मंजिल तो नहीं बदल गयी है ? कहीं यात्रा को ही तो मंजिल नहीं मान लिया गया? कहीं साधन साध्य पर हाबी तो नहीं हो गए हैं? इन्ही बातो पर चर्चा करने के लिए यह ब्लॉग है। आइये इस ब्लॉग के माध्यम से मंच की दश और दिशा पर कुछ चर्चा करें।

इस ब्लॉग की शुरुवात मैं मधुशाला की कुछ पंक्तियों से करना चाहूँगा।
धर्म- ग्रन्थ सब जला चुकी है
जिसके अन्तर की ज्वाला
मन्दिर, मस्जिद, गिरजे -सबको
तोड़ चुका जो मतवाला,
पंडित, मोमिन, पादरियों के
फंदों को जो काट चुका,
कर सकती है आज उसी का
स्वागत मेरी मधुशाला.
रांची में हो रहे महा कुम्भ की तैयारियां अपने जोरो पर हैं। अधिवेशन की थीम है - प्रगति, दिशा और लक्ष्य"।
कारवां २००८ में यह थीम सटीक और सामायिक है। पर सही थीम तय कर देने भर से अशिवेशन की सार्थकता तय नहीं हो जाती है। इसके लिए जरूरी है की नेतृत्व इस थीम पर कुछ कार्य करें। आशा करता हूँ की नेतृत्व जल्द ही अधिवेसन से अपनी अपेक्षाओं का खुलासा करेगा और थीम पर अपनी सोच भी सदस्यों के सामने रखेगा।
अभी इतना ही.........