इस ब्लॉग को प्रारम्भ करने का उद्देश्य: मंच की दशा और दिशा पर चर्चा करना। यह संवाद यात्रा AIMYM द्वारा अधिकृत नहीं है। संपर्क-सूत्र manchkibaat@gmail.com::"

नए संदेश

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Monday

प्रस्ताव - 1

अधिवेशन हेतु शाखाओं से प्रस्ताव आमंत्रित कर लिए गएँ हैं। आशा की जानी चाहिए कि शाखाएं गंभीरतापूर्वक चिंतन कर स्तरीय प्रस्ताव बिषय निर्वाचनी समिती को समयानुसार भेजेगी। आशा यह भी की जा सकती है कि इस बार कुछ नये और सामयीक प्रस्ताव सामने आयेंगें।
यह एक प्रस्ताव की रूप रेखा मेरे सामने भी आयी है, और मुझे लगता है कि व्यक्तिगत स्तर पर मुझे इस प्रस्ताव को सही मानना चाहिए। प्रस्ताव की रूप-रेखा यूँ है:-
मारवाडी समाज हमेशा से दानवीर समाज रहा है। देश के ज्यादातर शहरों, नगरों और कस्बों में हमारे समाज कि दानशीलता की निशानियाँ देखने को मिलती हैं। स्थायी और अस्थायी, सभी तरह के जन-सेवा कार्यो में यह समाज अग्रणी रहता आया है। लेकिन अफ़सोस यह है कि इस समाज द्वारा की गयी जन-सेवा का लेखा जोखा कभी नहीं बन पाया। आज जब कि नेताओं के आँखों में उंगली डाल कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का जमाना है, हमें कम से कम अपने समाज के योगदान का लेखा - जोखा तो समय समय पर राज नेताओं के समक्ष रखने की तैयारी तो रखनी चाहिए। मंच यदि अपना infrastructure और internet का सही व्यवहार करे तो यह कार्य मुश्किल भले ही हो असंभव नहीं है।
प्रस्ताव यूँ हो सकता है:-

मंच, मारवाडी समाज द्वारा पुरे देश में की जा रही जन सेवा कार्यो का एक data bank बनाने की दिशा में कार्य करेगा। इस data bank में स्थाई और अस्थायी, सभी प्रकार के प्रकल्पों का पूर्ण लेखा जोखा रखने का प्रयास किया जायेगा।

सभी पाठकों से अनुरोध है कि इस प्रस्ताव पर अपनी टिपण्णी अवश्य दें और यदि आप भी किसी प्रस्ताव के बारे में सोच रहें हैं, तो कृपया उस पर भी लिखें।

ध्यान दें! प्रस्ताव प्रेषित करने की अन्तिम तिथि १५ दिसम्बर बताई गयी है।
ओमप्रकाश

Friday

मत-दाता की सूची इन्टरनेट पर (असम)

असम के लोगो के लिए :-
यदि आप मतदाता सूची में अपने नाम के बारे में कोई जानकारी चाहते हों, या मत-दाता सूची सम्बन्धी कोई अन्य काम हो तो नीचे दिए गए साईट पर visit करें।
http://ceoassam.nic.in
ओमप्रकाश

७५% नेत्रदाता मारवाडी

इसी ब्लॉग में पढ़ा था कि गुवाहाटी में पिछले एक बर्ष में जितने भी नेत्रदान किए गए, उसमें ७५% नेत्रदाता मारवाडी थे। कल LIONS EYE HOSPITAL में इस बात की पुष्टि भी हो गयी। यही हाल रक्त दान के क्षेत्र में भी है। मेरा अनुमान है कि गुवाहाटी में रक्त दाताओं में सबसे ज्यादा संख्या मारवाडियों की ही रही है। इन बातों से मैं मुख्यतः दो बातों की और ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा:-

१। इस तरह की तथ्यपरक जानकारियों को सार्वजानिक कर क्या हम इस बात को स्थापित नहीं कर सकते हैं कि मारवाडी समाज सिर्फ़ अर्थ दान ही नहीं करता है, बल्कि यह समाज तो तन, मन और धन से सेवा करना अपना परम धर्म समझता है। इस समाज को दकियानूसी बताने वालों को ऐसे आंकडे इस जवाब के रूप में दिए जा सकते हैं कि, दकियानूसी समाज नेत्र-दान और रक्त दान नहीं किया करता है।

२। न सिर्फ़ गुवाहाटी या असम में बल्कि मारवाडी समाज पुरे देश में अपने सतत सेवा कार्यों द्वारा मानव समाज की भलाई में लगा हुवा है। न जाने कितने स्थाई और अस्थायी सेवा प्रोजेक्ट इस समाज द्वारा बिभिन्न नामों द्वारा संचालित है। क्या इन तथ्यों को आंकडे बना कर हम लोगो के सामने नहीं रख सकते? लेकिन ऐसे तथ्यों को इकठ्ठा करना सहज में होने वाला कार्य भी नहीं है। क्या हम इस दिशा मैं सोच सकते हैं कि, मारवाडी युवा मंच इन्टरनेट के माध्यम से इस महत्वपूर्ण कार्यो को अंजाम दें।

आप सभी कि प्रतिक्रिया आमंत्रित है।

ओमप्रकाश

Monday

कालजयी रचनाकार को रुखी बिदाई- प्रकाश चंडालिया

भड़ास: महाकवि सेठिया को रुखी

उपरोक्त लिंक पर क्लिक कर आप प्रकाश चंडालिया जी के विचार पढ़ सकते हैं।

ओमप्रकाश

Sunday

श्री भैरों सिंह जी शेखावत -मुख्य अतिथी

प्राप्त सूचनाओं के अनुसार श्री भैरों सिंह जी शेखावत ने अधिवेशन- कारवां 2008 में मुख्य अतिथी के रूप में पधारने का न्योता स्वीकार कर लिया है।

omprakash

Saturday

काली बिल्ली


व्यक्तित्व विकाश के सम्बन्ध में मेरे बिचारों पर पता नहीं शम्भू जी क्या टिपण्णी करने वालें हैं? पर इंतज़ार के अलावा मैं और कर भी क्या सकता हूँ।


जब बातें व्यक्ति विकाश और व्यक्तित्व विकाश की चल रही है तो जाहिर है, इस क्रम में कुछ समय बाद 'समाज सुधार' पर भी चर्चा तो होनी ही है। इस आने वाले चर्चा सूत्र हेतु तोरण द्वार के रूप में मैं पढ़ी हुई एक घटना का जिक्र आप सुधि पाठको के समक्ष करना चाहूंगा।


घटना यूँ बयां की जा सकती है....


शादी कर एक बहु रानी अपने ससुराल आयी। कुछ दिनों बाद ससुराल में उसकी एक मात्र ननद की शादी का शुभ अवसर आया। एक अच्छी सास की तरह उक्त बहु की सास भी सारे कार्यो में बहु को अपने साथ रख रही थी , ताकि बहु उस परिवार (कबीले) की परम्पराएँ/ रिती -रिवाज़ अच्छी तरह सीख ले। बहु भी मन से सरे रिती- रीवाजों को अच्छे से देख रही थी।


शादी के घर में एक काली बिल्ली पाली हुई थी। सासू जी ने सोचा की घर में शुभ कार्य हो रहा है, और यह बिल्ली आते जातों का रास्ता काट कर अपशकुन न करें, और उन्होंने नाई से कह कर उस बिल्ली को एक खंभे से बंधवा दिया। शादी सकुशल हो गयी। बिल्ली को भी मुक्त कर दिया गया।


समय चक्र चलता रहा। उसी घर में आज एक और शादी हो रही है। शादी हो रही है उस बहु की बड़ी बेटी की। सासुजी दीवार पर लटकी अपनी तस्वीर से आशीर्वाद दे रही है। बरात आने का वक्त होने लगा है। अचानक लड़की की माँ (बहू) को ध्यान आता है और नाई को तुंरत बुलवाया जाता है और उसे कहा जाता है की जल्द से जल्द जा कर कहीं से एक काली बिल्ली ले कर आए और उसे खम्भे से बाँध दे। परिवार की रीतियों का पालन होना जरूरी है। नाई काली बिल्ली ले कर आता है और उस काली बिल्ली को खंभे से बाँधा जाता है और तब शादी की बाकी रस्में निभायी जाती है।


ऐसी न जाने कितनी काली बिल्लिया आज भी हमारे आंगनों में ऐसी रीतियों के नाम से बाँधी जा रहीं है... है न ?


ओमप्रकाश