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मैं मारवाडी हूँ !!!

श्री भवंत अग्रवाल और श्री राजेश जैन ने एक बड़ा ही महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है, वास्तव में हमारी उम्र के युवाओं में इस प्रकार की भ्रांतियां हुई हैं, जिनका समाधान आवश्यक है. मैं स्वयं भी भ्रम की स्थिति में था की मै तो शेखावाटी (राजस्थान) का हूँ और महाराजा अग्रशेन जी का वंशज हूँ, इस नाते अग्रवाल हूँ और राजस्थानी हूँ पर मारवाडी....? आखिर जानकारियां इकट्ठी करने की कोशिश की और जो पाया उसे यहाँ आपसे बाँटना चाहता हूँ;
हमारे पूर्वज बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश की में शताब्दियों पूर्व राजस्थान, हरियाणा से निकल कर देश-विदेश में स्थानांतरित हुए, इनमे सबसे पहले निकलने वाले मारवाड़ (राजस्थान का एक क्षेत्र) के लोग थे, जो अपनी कर्मठता, कार्य और व्यवहार कुशलता, विपरीत परिस्थियों में भी सामान्य जीवन यापन की कला और गजब की व्यापारिक निति एवं विश्वसनीयता के कारण काफी प्रचलित हुए. इनकी वेश-भूषा, भाषा और खान - पान भी विशेष आकर्षण का केन्द्र होते थे. इनका एक और विशेष गुण ये था की ये जहाँ भी ये रहते थे वहाँ के स्थानीय लोगों के दुःख-दर्द को अपना समझते थे. अपने इन्ही गुणों के चलते ये लोग अपना सिक्का ज़माने में सफल हुए और चूँकि इनमे अधिकांश मारवाड़ से आए थे इसलिए मारवाडी कहलाये. बाद में इनलोगों ने अपने व्यापार या अन्य कार्यों में सहयोग के लिए अपने ईष्ट - मित्रों, रिश्तेदारों परिचितों को बुलाना शुरू कर दिया, जो पुरे राजस्थान या समीपवर्ती इलाकों (अब के राजस्थान, हरियाणा और मालवा आदि) के थे. आपसी समानता (गुणों और व्यव्हार में) और समन्वय के कारण ये लोग भी मारवाडी कहलाये जाने लगे. आज विश्व में ऐसे लगभग 9 करोड़ (एक अनुमान) मारवाडी हैं, जो अपने - अपने क्षेत्रों में अव्वल हैं और आज भी अपने प्रारंभिक गुणों, कर्मठता, कार्य और व्यवहार कुशलता, विपरीत परिस्थियों में भी सामान्य जीवन यापन की कला व्यापारिक निति एवं विश्वसनीयता के साथ परोपकार की भावना को अपनाए हुए हैं. ये लोग सिर्फ़ मारवाडी हैं ना की ब्राह्मण, क्षत्रिय, अग्रवाल या कुछ और, ना ही ये किसी क्षेत्र विशेष के कहे जाते हैं।
मुझे पूरी उम्मीद है की इस लेख से आपकी जिज्ञाषा शांत होगी.
(नोट - इस सन्दर्भ का एक महत्वपूर्ण शोध ग्रन्थ डॉ.श्री डी.के.टकनैत द्वारा रचित "मारवाडी समाज" है, जिसका अध्ययन करके और भी सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है)
- सुमित चमडिया
मुजफ्फरपुर
9431238161

1 comment:

Anonymous said...

महाराजा अग्रसेन के वंशज अग्रवाल हैं। मारवाड़ क्षेत्र के रहने वाले अग्रवाल मारवाड़ी अग्रवाल कहलाते हैं। अग्रवाल समाज के सभी लोगों को कर्मठता, कार्य और व्यवहार कुशलता, विपरीत परिस्थियों में भी सामान्य जीवन यापन की कला और गजब की व्यापारिक नीति एवं विश्वसनीयता जैसे गुण पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत में मिलते रहते हैं, चाहे कोई मारवाड़ी हो या किसी अन्य स्थान का रहने वाला हो। यही कारण है कि अग्रवाल समाज प्रत्येक क्षेत्र में भारत का सर्वाधिक विकसित व अग्रणी समाज है। इस सत्य को क्षेत्र विशेष में न बांधें।

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